Feb 24
Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा -
चूँकि मैं मूढमति हूँ – शंकाएं सहज भाव से मन में उत्पन्न हो जाती हैं l
होली खेलने के तरीकों पर विद्वज्जनों से शंका समाधान का निवेदन :
(१) क्या कृष्ण जी, अपने भवन की छत से – गुब्बारे में पानी भर कर – गोपियों पर फेंक कर – छुप जाया करते थे ?
(२) क्या कृष्ण जी, गोबर को बाल्टियों में भर कर रास्ते चलते गोपों पर फेंक कर गली में भाग जाते थे ?
(३) क्या कृष्ण जी, नाले का गन्दा पानी प्लास्टिक की थैलियों में भर कर रास्ते चलते लोगों पर फेंकते थे ?
(४) क्या कृष्ण जी, जूट की बोरी पर लिखने वाले लाल या हरे रंग के केमिकल को पानी में मिला कर राधा जी या गोपियों के चेहरे पर रगड़ देते थे ?
(५) क्या कृष्ण जी, रंग लगाने का बहाना करते हुए गोपियों से अश्लील हरकतें करते थे ?
(६) क्या कृष्ण जी, होली के अवसर पर भांग पी कर हुड्दंग करते थे – अश्लील गाने गाते थे ?
(७) क्या कृष्ण जी, रास्ते चलते सर्वथा अनजान लोगों को परेशान कर के बड़ी बेशर्मी से बोलते थे – बुरा न मानो होली है ?
आदरणीय विद्वान् जनों, मुझ अल्पज्ञानी का ज्ञान संवर्धन करें – कृपया भारत की संस्कृति के ग्रंथों से उद्धरण दे कर बताएं कि वर्तमान के कृष्ण भक्त उपरोक्त विधि से होली का पर्व मानते हुए बिलकुल सही ढंग से कृष्ण जी का अनुसरण कर रहे है – और हमारी भारतीय संस्कृति भी ऐसी ही है l
Kulwant Happy – स्पष्ट सत्य लिखते हैं, तो जमूरे रोते हैं। मदारी कहाँ देखता है, बस जमूरे देखते हैं।Feb 24
Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा – जिस तरह भारतीय संस्कृति का अधोपतन हो रहा है – प्रत्येक त्योंहार में वीभत्सता – अश्लीलता घुसा कर और फिर उसका बाजारीकरण कर के पैसे कमाने का षड़यंत्र चल रहा है – देख कर बहुत दुःख होता है l आप लोगों को इस तरह की होली खेल कर मजा आता हो तो बेशक चुप रहिएगाFeb 24
harendra kumar – भैया ये सब देखकर तो दिल मसोसकर रह जाने के अलावे और कुछ कर नहीं पाते हैं.अच्छा किये जो आप इस पर कुछ लिखे, नहीं तो मै जरूर लिखता.सबको पता है कि वो गलत कर रहे हैं होली के बहाने बस अपना मजा ले रहे हैं.लेकिन दूसरों को दुःख देकर ये कैसा मजा है…? वो भी होली के दिन.इस दिन तो प्यार और खुशी बांटी जाती है ना….. अपने दुश्मनों के साथ भी…..?फिर किसी को दुखी करना…..मै भी सबसे यही कहूँगा कि plll z zz zzzz zzzzz zzzzzzzz zzzzzzzzzzz साल में एक बार मौका आने के नाम पर या पर्व -त्योहार के बहाने थोडा सा मजा लेने के लिए होली जैसे हिन्दुओं के मुख्य और इतने अच्छे त्यौहार को बदनाम मत करिए.नहीं तो होली के साथ-साथ पुरी हिन्दू(भारतीय) संस्कृति पूरा हिन्दू धर्म कलंकित होकर रह जाएगा.इसके बाद फिर कृष्ण जी भी तो बदनाम होने से बचे नहीं रहपायेंगे….Feb 24
Dr. Mahesh Sinha – सही प्रश्न है आपका
लेकिन एक बात और सही है होली ज्यादातर हिन्दी भाषी राज्यों में ही खेली जाती है पूरे भारत में नहीं ?Feb 24
Arvind k Pandey – Yes,the real essence of festivals has taken a backseat !!One thing you missed Anandji that Krishna and company did not use to create disturbance by playing music too loud !!!!Feb 25
Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा – " डाक्टर सिन्हा जी, आपकी बात सही है कि होली ज्यादातर हिन्दी भाषी राज्यों में ही खेली जाती है – पूरे भारत में नहीं l सवाल सिर्फ होली के त्योंहार का नहीं है l असली मुद्दा मैंने अपने दूसरे प्रश्न में उठाया है कि – " जिस तरह भारतीय संस्कृति का अधोपतन हो रहा है – प्रत्येक त्योंहार में वीभत्सता – अश्लीलता घुसा कर और फिर उसका बाजारीकरण कर के पैसे कमाने का षड़यंत्र चल रहा है – देख कर बहुत दुःख होता है l "
केवल भारतीयों के ही त्योहारों में क्यों फूहड़पन, अश्लीलता, कानफाड़ू शोरशराबा, धन, समय और नैसर्गिक संसाधनों की बर्बादी (Criminal Wastage of Precious Time, Energy, Money and Resources) जान बूझ कर की जाती है ?
जान बूझ कर किये गए दुष्कृत्य को तो प्रज्ञापराध कहा जाता है l
इतने सारे – कुकुरमुत्ते की तरह उगे हुए – हिन्दू धर्म प्रचारक / कथा वाचक क्या लेश मात्र भी नहीं विचार करते हैं – इस तरह भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अधोपतन देख कर ?
और कोढ़ में खाज की तरह भारत का सिक यू लायर मिडिया – पैसा कमाने के लिए माँ को बेच दे – भारतीय संस्कृति और मूल्य तो किसी गिनती में ही नहीं आते l
हमें दूसरों से मतलब नहीं है – हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करनी है lFeb 25
Dr. Mahesh Sinha – @ शर्मा जी आपकी व्यथा एकदम उचित है
दिखावे के चक्कर में ये सब हो रहा है . केवल हिंदु ही नहीं इस देश में धीरे धीरे सारे धर्म इस राह पर चल पड़े हैं . मुझे याद है बचपन में केवल एक रथ यात्रा का जुलूस निकलता था आज होड़ लगी है जुलूस निकालकर ये जताने की कि कौन बड़ा . सब अपनी दुकानदारी चला रहे हैं .Feb 25




