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Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा -
ज़रा सोचिये – हमारे भारत महान में कॉमन वेल्थ खेल अभी हो जा रहें हैं या – पिछले ६३ वर्षों से रोज – दिन रात – हो रहें हैं |
लुटेरी सभ्यता वाले यूरोपियन देशों ने जिन जिन देशों पर राज किया और जी भर के लूटा – वे कॉमन वेल्थ – अर्थात सार्वजनिक संपत्ति – कहलाये |
उन सभी गुलाम देशों ने कालांतर में स्वाधीन होने के उपरांत अपनी स्थायी मानसिकता गुलामी का परिचय एवं पोषण करने के लिए अपना गुट बना लिया जिसे कॉमन वेल्थ कंट्रीज कहा जाता है |
पराधीनता हस्तांतरण के समय गौरांग महा प्रभु अंग्रेजों ने अपने ज़र-खरीद गुलामों को भारत की बागडोर देते समय दुबारा समझा दिया था – "डेक्को हाम ठुमखो इन्धिया का घद्दी फर भैठा खे झाता हाय – हमारा खाम ठीक से खरना ओउर हमारा सिस्थाम छालू राखना – राज खरना हाय ठो हमारा थरह इन्धिया खो खोमन व्हेल्थ समाझ खर रोझ लुठ्ते रहना – खोई घडबड़ नाय म्हांगठा हाय |"
हमारे ज़र-खरीद गुलामों ने कोर्निश करते हुए कहा – "जी हुजुर आपकी हर इच्छा का पूरा पूरा पालन किया जाता रहेगा – हम वचन देते हैं "
तब से भारत में रोज ही कॉमन वेल्थ खेल खेले जा रहे हैं एवं भारत को जी भर के लूटा जा रहा है |




