"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

अहंकार उन्नति के सारे रास्ते बंद कर देता ह ै।


एक मूर्तिकार था। उसकी बनाई मूर्तियांदूर-दूर तक प्रसिद्ध थीं। उसने अपने बेटे को भी मूर्तिकला सिखाई। वह भी अपने पिता के समान ही परिश्रमी और कल्पनाशील था। अत: जल्दी ही वह इस कला में पारंगत हो गया और सुंदर-सुंदर मूर्तियां बनाने लगा।
पर मूर्तिकार अपने पुत्र द्वारा बनाई गई मूर्तियों में कोई न कोई कमी निकालदेता। इस तरह कई वर्ष गुजर गए। सब उसकी तारीफ करते, लेकिन उसके पिता का व्यवहार नहीं बदला। इससे पुत्र दुखी और चिंतित रहने लगा।
एक दिन उसे एक उपाय सूझा। उसने एक आकर्षक मूर्ति बनाई और अपने एक मित्र के हाथों उसे अपने पिता के पास भिजवाया। उसके पिता ने यह समझकर कि मूर्ति उसके बेटे के मित्र ने बनाई है,उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की।
तभी वहां छिपकर बैठा उसका पुत्र सामनेआया और गर्व से बोला, यह मूर्ति तोमैंने बनाई है। आखिरकार यह मूर्ति आपको पसंद आ ही गई और आप इसमें कोई खोटनहीं निकाल पाए। मूर्तिकार बोला – बेटा मेरी एक बात गांठ बांध लो।
अहंकार व्यक्ति की उन्नति के सारे रास्ते बंद कर देता है। आज तक मैं तुम्हारी बनाई मूर्तियों में कमियां निकालता रहा, इसलिए आज तुम इतनी अच्छी मूर्ति बनाने में सफल हो पाए हो। यदि मैं पहले ही कह देता कि तुमने बहुत अच्छी मूर्ति बनाई है तो शायद तुम अगली मूर्ति बनाने में पहले से ज्यादाध्याननहीं लगाते।
यह सुनते ही पुत्र लज्जित हो गया। सारयह है कि कला के क्षेत्र में पूर्णता की कोई स्थिति नहीं होती। उत्तरोत्तर सुधार से ही श्रेष्ठता प्राप्त की जा सकती है।
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