"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

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Honesty Practiced when Nobody Watching or Nobody to Question – is Real Honesty


किसी जमाने में किसी मुल्क में एक सेक्यूलर बादशाह की हुकूमत थी |

उस सेक्यूलर बादशाह ने अपने सभी जीहजुरियों को हाकिम – काजी – मुलाजिम बना रक्खा था और वे खुलेआम घोटाले करते थे |

एक दिन उस सेक्यूलर बादशाह ने अपने वजीर को पूछा कि उसकी कितनी फ़ीसदी जनता बेईमान है ?

वजीर ने कहा 100% |

सेक्यूलर बादशाह ने कहा – यकीन नहीं होता – साबित कर के बताओ |

वजीर ने सेक्यूलर बादशाह से कहा कि आप कल ही अपने इस महल के सामने का तालाब पानी से खाली करवा दीजिये और मुनादी फिरवा दीजिये कि परसों अमावस की रात के घुप्प अन्धेरे में हर एक आदमी औरत को एक-एक लोटा दूध का इस तालाब में डालना जरुरी है |

जैसी मुनादी फिरवाई गयी – जनता ने अमावस की रात के घुप्प अन्धेरे में एक-एक लोटा तालाब में डाल दिया |

अमावस की रात के बाद सूरज निकलने पर तालाब को देखने सेक्यूलर बादशाह और वजीर महल की छत पर पहुँचे |

तालाब में खालिस पानी भरा हुआ देख कर वजीर तो इत्मिनान से खड़ा मुस्कुराता रहा लेकिन सेक्यूलर बादशाह ने हैरत में पड़ कर वजीर से पूछा – ये क्या है ?

वजीर ने कहा – हुजूर – जान की अमानत पाऊँ तो अर्ज करूँ |

सेक्यूलर बादशाह ने जान बक्श देने की कही तो वजीर ने कहा कि हुजूर – जिस मुल्क मे काजी – हाकिम और सारे के सारे मुलाजिम बेईमान हों – वहाँ की जनता भी मजबूरी में बेईमानी नहीं करेगी तो कहाँ जायेगी ?

वजीर ने सेक्यूलर बादशाह से कहा कि आपकी पूरी जनता को बेईमान बना दिया गया है और इसी वजह से हर एक आदमी औरत ने सोचा कि अमावस की रात को दूध की जगह पानी डाल देने से न तो कोई फ़र्क पड़ेगा और न ही कोई पकड़ में आयेगा – और इस वजह से सब ने पानी ही डाला |

भारत में भी यही सूरत-ए-हाल है |

पिछले 67 बरसों की सेक्युलरी हुकूमत ने अपने जीहजुरियों को काज़ी – हाकिम – मुलाजिम बना कर हर छोटे बड़े ओहदे पर काबिज कर रक्खा था – जिसकी वजह से ज्यादा तो नहीं – सिर्फ़ 99% हिन्दू जिन्दा रहने के वास्ते मजबूरन बेईमान बन गये |

जब भी भारत पर कोई आफ़त आती है और हिन्दुओं से मदद की उम्मीद की जाती है तो हर हिन्दू आदमी औरत उस अमावस की रात के घुप्प अन्धेरे में जिसमें कोई किसी को देख न पाये – दूध के बजाय पानी डाल देता है और सोच कर ख़ुश हो जाता है कि सिर्फ़ उसके अकेले के भारत को मदद नहीं करने से न तो फ़र्क पड़ेगा और न ही कोई पूछने वाला है |

मैंने ये कहानी 2 बरस पहले लिखी थी लेकिन अभी मौका आया है जब कि भारत के प्रत्येक हिन्दू आदमी औरत को भारत के दुश्मनों का बनाया किसी भी तरह का माल नहीं खरीद या बेच कर भारत की निजी तौर पर मदद करनी है और अपनी वतनपरस्ती का सबूत देना है |

नतीजे ही बतायेंगे कि हर बार की तरह इस बार भी तालाब खालिस पानी से भरा गया या उसमें कुछ लोगों ने इन 2 बरसों में ईमानदार बन कर दूध भी डाला !!!

चलो देखते हैं कितने लोगों ने भारत के दुश्मनों की बनायी और बेची गयी चीजों के इस्तेमाल से कितने दिनों तक तौबा कर के अपनी वतनपरस्ती का सबूत दिया |

By: A. G Sharma
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