"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

विरोध प्रकट करने के अद्भुत तरीके


10:55 am
Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा
विरोध प्रकट करने के अद्भुत तरीके

मेरे एक परिचित जो पिछले २५ वर्षों से अक्सर जापान और चीन जाते रहते हैं – उन्होंने बताया था कि :

(१) जापानी सरकार और निजी उद्योग भी – अपने कर्मचारियों को – जो "कर्म ही धर्म है" की सूक्ति को पूर्ण निष्ठा से क्रियान्वित करते हैं – अवकाश ले कर सपरिवार कहीं पर्यटन पर जाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और उसके लिए पैसे भी देते हैं | यदि किसी एक या अनेक कर्मचारियों को किसी बात पर विरोध प्रकट करना है – तो वे अधिक उत्पादन कर के विरोध प्रकट करते है – या फिर रात में अपने शीर्ष अधिकारी के घर के सामने बिना शोर किये – मुंह पर पट्टी बांधे – हाथों में अपनी व्यथा लिखी तख्तियां लिए खड़े रह कर मूक प्रदर्शन कर के उस अधिकारी को भावनात्मक रूप से उद्वेलित करते हैं |

(२) चीन में अनेक कारखाने देखते समय उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया कि सभी कर्मचारी नियत समय के पहले काम पर उपस्थित हो जाते हैं – कोई भी कर्मचारी काम के समय किसी भी प्रकार के व्यसन – हमारे यहाँ के गुटका सिगरेट खैनी के अलावा खेल राजनीति और फ़िल्मी चर्चा की तरह – में कीमती समय बर्बाद नहीं कर रहा है – सभी लोग बड़ी तन्मयता से अपने काम में जुटे हुए हैं | पेट दर्द या बुखार का झूठा बहाना या डाक्टर का झूठा पर्चा नहीं चलता है क्योंकि अस्वस्थता के कारण काम पर न आने की सूचना देनी पड़ती है और कंपनी का डाक्टर घर पर आ जाता है | जहाँ जापान में "कर्म ही धर्म है" स्वयंस्फूर्त है – चीन में "कर्म ही धर्म है" राज्य द्वारा प्रेरित है |

(२-१) ये सारे बंद – हड़तालें – टूल डाउन – वर्क टू रुल – गो स्लो – घेराव – तालाबंदी – इत्यादि उत्पादन विरोधी गतिविधियाँ कम्युनिस्ट विचारधारा द्वारा पूंजीवादी विचारधारा के विरोध में उपयोग की जाती हैं | परन्तु घोर विडम्बना है कि कम्युनिस्ट विचारधारा वाले देश में ही इनके बारे में सोचना भी अति गंभीर अपराध है और इस देशद्रोही सोच के लिए सजा में मृत्युदंड तक का विधान है |

उपरोक्त बातें मेरी सुनी हुई है – मैंने स्वतः देखी नहीं हैं – अतः इनमें कितनी सत्यता है – पता नहीं – फिर भी – सोचिये ज़रा – हम लोग क्या कर रहें हैं |

क्या काम बंद कर देने से समस्या का समाधान हो जाता है ? यदि ऐसा है तो ज़रा सोचिये कि मानव शरीर में सबसे निकृष्ट समझे जाना वाला अवयव – जिसका नाम लेना भी लोग ख़राब समझते है – मलद्वार – यदि अपना काम बंद कर दे तो क्या होगा पूरे शरीर का | हमारे देश में तो देश के मस्तिष्क से लेकर आंख कान नाक मुंह हाथ पैर ह्रदय फुफ्फुस लीवर किडनी पैंक्रियास छोटी आंत बड़ी आंत – सब के सब छोटी से छोटी बात पर भी हड़ताल पर जाने का षड्यंत्र रचते रहते हैं |

पता नहीं इस देश का क्या होगा – ज़रा सोचिये |

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