"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

समस्या का एक मूलभूत कारण


3:02 pm Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा

प्रत्येक समस्या का एक मूलभूत कारण (Root-cause) होता है |

भारत की समस्त वर्त्तमान समस्याओं के भी मूलभूत कारण हैं |

हम सब भारत के जिस प्राचीन ज्ञान की चर्चा कर रहें हैं – उसे इस देश के अति चालाक शत्रुओं ने अपना शाशन स्थापित होने के साथ ही एकाग्रचित्त हो कर "Conspiracy of Systematic De-programming of Young and Immature Minds" का अनवरत प्रयोग कर के – पिछली एवं वर्तमान पीढ़ी का मानस परिवर्तन कर दिया…प्रत्येक समस्या का एक मूलभूत कारण (Root-cause) होता है |

भारत की समस्त वर्त्तमान समस्याओं के भी मूलभूत कारण हैं |

हम सब भारत के जिस प्राचीन ज्ञान की चर्चा कर रहें हैं – उसे इस देश के अति चालाक शत्रुओं ने अपना शाशन स्थापित होने के साथ ही एकाग्रचित्त हो कर "Conspiracy of Systematic De-programming of Young and Immature Minds" का अनवरत प्रयोग कर के – पिछली एवं वर्तमान पीढ़ी का मानस परिवर्तन कर दिया है – एवं इस नीच कर्म में उन्हें अप्रत्याशित सफलता प्राप्त हुई है |

अभी की नई पीढ़ी तो जैसे माता के गर्भ से ही अभिमन्यु सीख कर पैदा हुआ था – उस तरह पूर्णतया पश्चिमोन्मुख एवं पतानोंमुख है – एवं उन्ही के मिथ्याचार के रंग ढंग में जी रही है |

अपनी अक्षम्य भूलों के लिए शत्रु को दोष देना अपनी ही भूलों में वृद्धि करना है |

किसी को मधुमेह – दमा – राजयक्ष्मा – एड्स – कैंसर का रोग हो जाये तो वह रोगी पहले मूलभूत कारण का निवारण एवं चिकित्सक द्वारा निर्दिष्ट उपचार न कर के – मधुमेह के लिए शक्कर को – दमा के लिए बीडी चिलम सिगरेट को – राजयक्ष्मा के लिए दूषित वातावरण एवं आहार को – एड्स के लिए नगरवधुओं से संसर्ग को – कैंसर के लिए तम्बाकू के पत्तों को कोसता रहे – तो इस मूर्खतापूर्ण कार्य से वह रोगी तो कदापि स्वस्थ नहीं हो सकता है |

कोसते रहने से समस्या का समाधान कदापि नहीं हो सकता है |

भूतकाल में जो भूल हो चुकी हैं उनकी पुनार्वृत्ति न हो – यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है |

इसके साथ साथ हमें अपने देश में Talent Management की एवं Proper Documentation की सोच की स्थापना की तीव्र एवं त्वरित आवश्यकता है |

जिस बालक की जिस काम में रूचि हो – उसे उसी में अग्रसर एवं निष्णात होने देने में समस्त सहायता प्रदान करना – यह समाज एवं शाशन का कर्तव्य है |

हमारे देश में वैज्ञानिक प्रतिभा की कोई कमी नहीं है – परन्तु जब उन्हें प्रोत्साहन देने के स्थान पर अवहेलना – उपहास एवं तदुपरांत शाशन द्वारा नाना प्रकार से मार्ग अवरुद्ध किये जाने से मानसिक प्रताड़ना मिलती है तो वे देश से दुबारा यहाँ नहीं आने की प्रतिज्ञा के साथ पलायन करते हैं |

हमारे देश भारत के सर्वथा विपरीत – पश्चिमी देशों की यह विशेषता है कि वे विद्वान् एवं प्रतिभाशालियों के आदर सत्कार एवं उन्हें मनचाही सुविधाएँ देने में बहुत उदार हैं |

हमें सर्वप्रथम यह सुनिश्चित करना है कि क्या श्रेयस है एवं क्या प्रेयस |

हम लोगों ने प्रेयस का अन्धानुकरण कर के श्रेयस को भुला दिया है एवं हमारी दुर्दशा उसी की परिचायक है |

हमारे समाज को भांड – नगरवधुओं – रुपजिवाओं – धन लोलुप नेताओं चाटुकारों एवं खिलाड़ियों को सर्वथा त्याग कर – विद्वान् – अनुसंधानकर्ता एवं वैज्ञानिक को विशिष्ठ स्थान एवं समुचित सम्मान देने कि नीति अपनानी होगी – तभी देश का कल्याण हो सकता है अन्यथा कदापि नहीं |

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