"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

मोमबत्ती ब्रिगेड


आज २६ नवम्बर की रात हमारे जैसे टुच्चे लोगों के लिए नपुंसक आक्रोश एवं शोक की रात है लेकिन यही रात "मोमबत्ती ब्रिगेड" के स्थापना दिवस के जश्न की रात है |

तो लीजिये पेश है गूगल बज्ज (९ मई २०१०) के दिन आदरणीय गुरुजनों की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से रचित "मोमबत्ती ब्रिगेड" का स्तुति गान जिसमें बहुपयोगी मोमबत्ती की अलौकिक महिमा का यथाशक्ति बखान है | लेकिन उसके पहले प्राक्कथन अर्थात Preface या भूमिका – जो भी समझें – झेल लीजिये |

जब नीयत होती है – तो बनते बनते औकात भी बन जाती है |

एक विचार मेरे मन में बारम्बार कौंधता है कि जब सहत्र घाव कर के मृत्यु देने की गर्वोक्ति ही नहीं अपितु उस गर्वोक्ति को कार्यान्वित करने वाले शत्रु का लेशमात्र भी प्रतिकार करने नीयत ही नहीं है तो औकात कैसे बनेगी ?

क्या पानी पी पी कर कोसने मात्र से पारंपरिक एवं खानदानी शत्रु अपना अनुवांशिक रूप से प्राप्त सहज स्वभाव त्याग देगा ?

क्या स्पैम मेल भेजने वाले का एक ईमेल अकाउंट बंद कर देने से वह दूसरा ईमेल अकाउंट खोल कर स्पैम मेल नहीं भेजेगा ? उसी तरह कैम्प बंद कर देने का राग अलापने से क्या होगा ? शैतान तो दिमाग में होता है – कैम्पों में नहीं |

हमारे हुक्मरानों की औकात तो बस ज्यादा से ज्यादा "कड़ा जबाब" दे कर अपने कर्तव्य की इतिश्री करनी है | लेकिन क्या यह "कड़ा जबाब" देना भी उनकी औकात से ज्यादा नहीं है ?

अपनी औकात से ज्यादा काम करने पर सेहत ख़राब हो जाती है – दुबारा गद्दीनशीन होने के रहे सहे आसार भी कमजोर होने लगते हैं |

वैसे भी हमारी गौरवशाली सेना की मौजूदगी हमारे शत्रुओं को एवं हमारे देश में रह रहे उनके मानसपुत्रों को सख्त नापसंद है |

हमारे हुक्मरानों को शत्रु के मानसपुत्रों की पसंद – नापसंद का बहुत ख्याल रखने की मज़बूरी है – गद्दीनशीन जो रहना है |

हमारे नकाबपोश हुक्मरानों का बस चले तो आज की आज सेना को बर्खास्त कर के मोमबत्ती ब्रिगेड बना दें |

इस मुल्क के हर एक बाशिंदे का फ़र्ज़ है कि एक सच्चे नागरिक की हैसियत से हुक्मरानों की दिली ख्वाहिश की जानकारी या भनक मिलते ही एक आदर्श चापलूस की तरह – एक सच्चे वेदर कॉक की तरह अपना रुख हवा के बहने की दिशा में कर लेना चाहिए |

हुक्मरानों का मिजाज देखते हुए एक निहायत ही सेक्यूलर कविता – "मोमबत्ती ब्रिगेड" – लिखी है क्योंकि इस "मोमबत्ती ब्रिगेड" के सभी सैनिक और सेनापति केवल सेक्यूलर लोग ही हो सकते हैं – किसी भी तरह के कौम्युनल टाइप के लोग इसमें भर्ती नहीं हो सकते हैं |

"मोमबत्ती ब्रिगेड"
Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा – Buzz – Public
हर छोटे बड़े या लाइलाज मर्ज़ की बस एक दवा – मोमबत्ती !
शर्तिया, अकसीर, बेहद आसान और निहायत सस्ता इलाज – मोमबत्ती !

फ़ौरन से पेश्तर फायदा – एक बार अजमाइश कर के देखें – मोमबत्ती !

2 people liked this – Raju Mishra and Siddharth Pradhan

Amitabh Mishra – कैसे, कैसे? तनिक खुलासा करने की कृपा करें.
Dr. Mahesh Sinha – ये फंसा !

Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा –
खुलासा करने के लिए इस्तेमाल करें – मोमबत्ती !
आस जगाये मोमबत्ती – त्रास मिटाए मोमबत्ती !
मनपसंद रंगों साईंजों की ले आइये मोमबत्ती !
स्नेह बढ़ाये मोमबत्ती – प्रेम जगाये मोमबत्ती !

आत्मनिर्भर बनाये मोमबत्ती – समाधान है मोमबत्ती !
बस मोमबत्ती इस्तेमाल करें – बाकी सब काम कर लेगी मोमबत्ती !

Dr. Mahesh Sinha – खुलासा करने के लिए इस्तेमाल करें😉

Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा –
बिजली चली जाये तो – बहुत याद आये मोमबत्ती !

जिज्ञासा जगाये मोमबत्ती – कौतुक दिखाए मोमबत्ती !
समीप लाये मोमबत्ती – प्यार बढ़ाये मोमबत्ती !
विरोध प्रदर्शन की रात को भी काम आये मोमबत्ती !
विरोध प्रदर्शन न हो तब भी बहुत काम आये मोमबत्ती !
छोटी या लम्बी – पतली या मोटी – पर ले लो मोमबत्ती !

सहज सुलभ सलोनी और सस्ती – प्यारी प्यारी मोमबत्ती

भई – ये तो "मोमबत्ती ब्रिगेड" के लिए हिन्दी में जिंगल लिखी है – किसी को पसंद आ जाये तो अच्छी कमाई होने की आशंका है !!!

Rajeev Nandan Dwivedi – मोमबत्ती छाप कविता !!

Dr. Mahesh Sinha – अरे बच के रहना बड़ी खतरनाक मोमबत्ती है !

Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा –
पापियों के पाप का प्रतिकार है – पुनीत पावन मोमबत्ती !
अत्याचारों और बलात्कारों का जवाब है – मोमबत्ती !
बंदूकों और बमों का जवाब है – निरीह अबला मोमबत्ती !

हिंद की फौज के हाथों में भी थमा दो अब – मोमबत्ती !

दुश्मनों के दिल पिघल जायेंगे देख कर – मोमबत्ती !
शैतानों के दिल में करुणा का संचार करे – मोमबत्ती !
बलात्कारी को राखी बंधवाने पर मजबूर करे – मोमबत्ती !
चीन और पाकिस्तान से हड़पी जमीं वापस दिलाये – मोमबत्ती !

जल्दी से निकाल लो अब तो अपनी अपनी – मोमबत्ती !
सीमा पर जा कर चीन और पाकिस्तान को दिखाओ – मोमबत्ती !
जवानी में जा कर बुढ़ापे तक उन्हें दिखाते रहो – मोमबत्ती !
फिर कुछ न बात बने तो वापस अंदर कर लो – मोमबत्ती !

Dr. Mahesh Sinha –
कुछ न बात बने तो वापस अंदर कर लो मोमबत्ती !
जलती हुई या बुझी हुई ?

Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा –
शाश्त्रोक्त विधि है कि पहले मोमबत्ती को फूंक मार कर बुझा ली जाये – फिर सुहाता सुहाता ठंडा होने पर वापस यथास्थान स्थापित कर दी जाये | "A Place for Every Thing and Every Thing in Its Place" – ऐसा शाश्त्रों में विधान है |

मोमबत्ती पुराण में ६४ वें अध्याय में इसकी अपार शक्ति का उल्लेख है | उसके बाद ७२ वें अध्याय में भविष्यद्रष्टा रचयिता ने अपनी अतीन्द्रिय शक्ति का प्रयोग कर स्पष्ट रूप से घोषणा कर दी है कि कलिकाल में भरतखंड – जो इंडिया के नाम से प्रसिद्ध होगा – उसके अपनी मातृभूमि की अस्मिता और सुरक्षा के प्रति उदासीन अथवा शत्रु देशों के प्रति निर्विकार भाव रखने वाले नागरिक – मातृभूमि में फैले हुए अनाचार – भ्रष्टाचार – दुराचार – व्यभिचार इत्यादि समस्त अचारों से सद्भाव रखने वाले नागरिक – इस महिमामई अलौकिक शक्ति से युक्त मोमबत्ती को प्रज्ज्वलित कर के मूक प्रदर्शन करके संतुष्ट होंगे और शांति को प्राप्त होंगे |

ऐसा भी वर्णन है कि कुछ प्रहसन प्रिय – विनोदी स्वभाव के मूर्ख "भैंस के आगे बिन बजाये – भैंस पड़ी पगुराय" की तर्ज पर "दुश्मन के आगे मोमबत्ती जलाये – दुश्मन खड़ा मुसकाय" जैसी घटिया लोकोक्तियाँ भी प्रचलित करने का निरर्थक एवं असफल प्रयास करेंगे परन्तु "मोमबत्ती मार्गी" नागरिक अपनी मोमबत्ती श्रद्धा पर अडिग एवं अविचलित रह कर अग्रसर होते रहेंगे |

भविष्यद्रष्टा रचयिता ने इसवी सन २०२० तक तो पारंपरिक सैन्य शक्ति का पूर्ण विखंडन और उसके स्थान पर "मोमबत्ती वाहिनी" अर्थात "मोमबत्ती सेना" का बहुत लोमहर्षक वर्णन किया है जिसमें नाना प्रकार के "मोमबत्तीधारी" प्रतिभाशाली युवावर्ग द्वारा विस्मयकारी "मोमबत्ती सञ्चालन" से भयाक्रांत शत्रु सेना त्राहि त्राहि करते हुए आत्मसमर्पण कर देगी यह याचना करते हुए कि भले ही सूली पर चढ़ा दो परन्तु मोमबत्ती से बक्श दो |

जीर्ण शीर्ण भोजपत्र पर लिखित मोमबत्ती पुराण के केवल २ पृष्ठ ही वर्तमान में उपलब्ध हैं जिन्हें बहुजन हिताय बहुजन सुखाय की भावना से प्रेरित हो कर आपके समक्ष प्रस्तुत किया है |

Chankya Sharma – अच्छा है मोमबत्ती पुराण !
हमारी सरकार ने भी इसपर एक अध्यादेश लाने का विचार बना रही है की अगर जनता ज्यादा शोर मचाती है तो उनको जबरदस्ती मोमबत्ती दे दी जायेगी .??
मज़े से जलाओ और प्रदर्शन करते रहो ?
बहुत काम की है मोमबत्ती ………….

Dr. Mahesh Sinha – सरकार कोई भी वस्तु मुफ्त में नही देती

Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा – झांसे – झूठे आश्वासन और कुर्सी हथियाने के बाद ठेंगा तो मुफ्त में देती है |

Dr. Mahesh Sinha – इसके बदले वोट लेती है

Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा – और वोट के बदले में चोट देती है

Chankya Sharma – चोट के अलावा , पीटने के पैसे भी टैक्स के बदले लेती है !
वोट के बदले नोट लेने वालो की वजह से ही ये लोग आते है !!

नोटों के बल पर इनका गुणगान करने वाले , पत्रकारों के बल पर ,
सरकार असलियत में शायद ये कुछ भ्रष्ट पत्रकार ही चला रहे है !
जिनके नाम अभी सी बी आई खोल देगी ?
नहीं तो आपका ये विज्ञापन काम आयेगा

One response

  1. बहुत बढ़िया आजकल जिस तरह गांधी नेहरू ज्ञान पढ़कर हिजड़ी फौज तैयार हो रही है उसी तरह से मोमबत्ती की खपत भी बढ़ रही है …
    by प्रताप सिंह

    November 4, 2011 at 10:19 PM

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