"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

सूक्ष्म की शक्ति: १


Anand G.Sharma आनंद जी.शर्मा

यह सदैव ध्यान में रखने योग्य विचार है कि कोई भी बड़ा कार्य करने के लिए आवश्यक नहीं कि उसके लिए बहुत शोर किया जाय – उसका खूब प्रचार किया जाय l चुपचाप – एकदम शांति से – बिना प्रचार किये भी महान कार्य संपन्न किये जा सकते हैं l उदाहरणार्थ – राम चरित मानस में उधृत गिलहरी एवं महाभारत में उधृत नेवले का रोचक किन्तु प्रेरणादायी प्रसंग पुनः प्रस्तुत है : सूक्ष्म की शक्ति ऐवम नगण्य का महात्म्य १. सूक्ष्म…यह सदैव ध्यान में रखने योग्य विचार है कि कोई भी बड़ा कार्य करने के लिए आवश्यक नहीं कि उसके लिए बहुत शोर किया जाय – उसका खूब प्रचार किया जाय !

चुपचाप – एकदम शांति से – बिना प्रचार किये भी महान कार्य संपन्न किये जा सकते हैं !

उदाहरणार्थ – राम चरित मानस में उधृत गिलहरी एवं महाभारत में उधृत नेवले का रोचक किन्तु प्रेरणादायी प्रसंग पुनः प्रस्तुत है :

सूक्ष्म की शक्ति ऐवम नगण्य का महात्म्य
जिन हिन्दुओं ने राम चरित मानस पढ़ी अथवा सुनी है उनके मानस पटल पर सेतुबंध रामेश्वरम के निर्माण का सन्दर्भ अवश्य ही अंकित होगा l

बड़े बड़े वानर दूर दूर से बड़े बड़े प्रस्तर खंड उठा कर ला रहे थे और नल ऐवम नील उन पर अपने हाथों से श्री राम का नाम लिख कर सागर में प्रवाहित कर रहे थे l

चूँकि नल ऐवम नील को एक ऋषी द्वारा शाप मिला था कि उनके छुए हुए प्रस्तर जल में नहीं डूबेंगे, उनके शाप का सदुपयोग सेतुबंध रामेश्वरम के निर्माण में हो रहा था – जिसमे प्रस्तर खंड सागर पर तैर रहे थे l

उसी समय एक वानर ने एक छोटी सी गिलहरी को देखा जो बार बार पानी में जा कर अपने शरीर को भिगोती थी और फिर सागर तट की बालुका में लोट पोट हो कर अपने शरीर पर चिपके हुए बालुका कणों को सेतु पर ला कर झड़का रही थी l

यह कौतुक देख कर वानर ने उस गिलहरी से प्रश्न किया कि वो ये क्या कर रही है – इस कार्य का क्या प्रयोजन है? क्या वह मानसिक विक्षिप्त है ?

उस गिलहरी ने अपना कार्य निर्बाध रूप से संपन्न करते हुए शांत भाव से उत्तर दिया कि इस सेतु के निर्माण में अपना यथाशक्ति सहयोग दे कर वह प्रभु श्री राम की सेवा कर रही है l

गिलहरी का उत्तर सुन कर वानर हंसने लगा ऐवम दूसरे वानरों को इस सबसे बड़े हास्यास्पद दृश्य को देखने के लिए पुकारने लगा l

सभी एकत्रित वानर यूथ उस नन्ही गिलहरी का हास्य करने लगे ऐवम कहने लगे कि कहाँ तो हम सब वानर जो अपार संख्या में हैं ऐवम इतने बड़े बड़े प्रस्तर खंड ला कर सेतु निर्माण का अथक प्रयत्न कर रहे हैं और कहाँ यह गिलहरी कुछ बालुका कण ला कर गिरा रही है जो दिखते भी नहीं है l

कोलाहल ऐवम कार्य स्थगन देख कर प्रभु श्री राम स्वयं आ पहुंचे l

वानरों ने तिरस्कार मिश्रित हास्य से गिलहरी की मूर्खता का वर्णन किया l

प्रभु श्री राम ने वानरों के हास्य को अनसुना कर के गिलहरी को उठा लिया ऐवम अपनी हथेली पर रख कर स्नेहपूर्वक उसके सिर पर हाथ फेरने लगे ऐवम कहा कि, "मैं तुम्हारी सेवा से प्रसन्न हूँ" l

राम चरित मानस में वर्णित दृष्टान्तों में प्रभु श्री राम ने केवल तीन के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ फेरा है l

पहले हैं जटायु, दूसरी है गिलहरी ऐवम तीसरे हैं श्री राम दूत हनुमान l

इन तीनों ने बिना किसी अपेक्षा के निःस्वार्थ सेवा की l

गिद्धराज जटायु को किसी ने सीता माता की रक्षा के लिए रावण से युद्ध कर अपने प्राणोत्सर्ग करने नहीं कहा था l

जटायू के प्राणांत के समय पहुँच कर प्रभु श्री राम ने निःस्वार्थ सेवा का आभार प्रकट किया ऐवम सिर पर हाथ फेरा l

उसी प्रकार गिलहरी की निःस्वार्थ सेवा से प्रसन्न हो कर उसके सिर पर हाथ फेरा l

श्री राम दूत हनुमान तो प्रभु के परम प्रिय हैं क्योंकि उनके तो समस्त कार्य मात्र प्रभु श्री राम की निःस्वार्थ सेवा है l

प्रभु श्री राम ने हनुमान जी के सिर पर सस्नेह हाथ फेरते हुए कहा – मैं तुम्हारी सेवा से उऋण नहीं हो सकता l

इन तीनो भक्तों की विशेषता थी की इन्होने बिना किसी के आदेश के ऐवम बिना कोई अपेक्षा रखे प्रभु का कार्य किया l

इसके दूसरी तरफ विशाल वानर सेना महाराज सुग्रीव के आदेशानुसार कार्य कर रही थी ऐवम स्वयं सुग्रीव प्रभु श्री राम का ऋण चुका रहे थे जो बाली के वध पश्चात राज्य पाप्ति पर उनके सिर पर आ गया था l

नन्ही गिलहरी का योगदान भले ही कितना भी सूक्ष्म हो – उसकी भावना ने प्रभु श्री राम का मन मोह लिया ऐवम वह उनकी कृपापात्र बनी जब कि बड़े बड़े प्रस्तर खंड ले कर आने वाले वानर यूथ प्रभु के स्नेह से वंचित रहे l

उस नन्ही गिलहरी की तरह मेरा भी यह सूक्ष्म प्रयास है – अपनी मातृभूमि भारत की सेवा का – मातृभाषा हिंदी की सेवा का l 

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