"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

प्रधानमंत्री आला दर्जे के धूर्त हैं


अगर प्रधानमंत्री के ही तर्क को मान लिया जाए तो कांग्रेस को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा करने का क्या अधिकार है? 2002 के गुजरात दंगों के बाद मोदी दो-दो चुनावों में भारी मतों से जीत चुके हैं। अब प्रधानमंत्री के ‘न्याय शास्त्र’ के मुताबिक तो मोदी के कृत्यों पर भी सवाल नहीं उठाया जा सकता है, क्योंकि जनता ने उनके खिलाफ आरोपों को भी खारिज कर दिया है। मोदी ही क्यों फिर तो हमारे लोकतंत्र को कलंकित करने वाले सारे अपराधी ‘माननीय’ जो चुनाव जीतकर सांसद या विधायक बनते हैं, लोकतंत्र के इन मंदिरों (संसद और विधानसभा) तक पहुंचते ही उनके सारे पाप धुल जाने चाहिए।

भारत की राजनीति साफ-सुथरी नहीं है। यहां पंचायत से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक सब कुछ खरीदा और बेचा जाता है इस सत्य को सारे दल जानते हैं। इस सत्य की पुष्टि के लिए किसी विकीलीक केबल की जरूरत नहीं है।

भारत की बुर्जुआ राजनीति में घूस को बुरा नहीं मानते,कानूनी नजरों में बुरा मानते हैं,वह भी बुर्जुआजी के सड़े हुए चरित्र पर परदा डाले रखने के लिए,इससे बुर्जुआ राजनीति में ईमानदारी का नाटक चलता रहता है। बुर्जुआ राजनीति में इस कदर सडांध भरी है कि आप एक मसले पर पकड़ नहीं पाते तब तक दूसरा घोटाला सामने आ जाता है। कानूनी पर्दे की आड़ में बुर्जुआजी आराम से सत्ता की लूट जारी रखता है।

भ्रष्ट राजनीती का शिखंडी

मनमोहन सिंह ने कहा, “चौदवीं लोकसभा में भी रिश्वत का मुद्दा उठा था और उसकी जाँच एक समिति ने की थी. समिति ने पाया था कि इस बारे में आगे कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं.लेकिन मुझे ये देखकर निराशा हुई है कि विपक्ष भूल गया है कि उसके बाद क्या हुआ था. उसके बाद हुए आम चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और वामदलों के सांसदों की गिनती घटी थी जबकि कांग्रेस के सांसदों की संख्या 145 से बढ़कर 206 हो गई थी.”

प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा, “ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष उन आरोपों को उठा रहा है जिन्हें भारत की जनता चर्चा के बाद सिरे से ख़ारिज कर चुकी है. मैं ये कह सकता हूँ कि कांग्रेस पार्टी या फिर सरकार की ओर से किसी ने कोई ग़ैर-क़ानूनी काम नहीं किया है.”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे ऐसी ख़रीद की कोई जानकारी नहीं है और मैं ज़ोर देकर स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैने किसी को सांसदों का वोट ख़रीदने की अनुमति नहीं दी है. सांसदों के वोट ख़रीदे जाने की किसी घटना की मुझे जानकारी नहीं है. मैं पूर्ण विश्वास से कह सकता हूँ मैं ऐसी किसी सौदेबाज़ी का हिस्सा नहीं हूँ.”

विकीलीक्स पर सार्वजनिक की गई जानकारी एक अमरीकी राजनयिक के अपनी सरकार को भेजे संदेश पर आधारित है.

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