"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

सत्तारूढ़ दल


सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक तो यह है कि सत्तारूढ़ दल के पदाधिकारी या सरकार के मंत्रियो ने एक बार भी देश की जनता से अपने कुकृत्य के लिए माफी नहीं मांगी? और बजाय ए राजा, कनीमोझी, सुरेश कलमाडी, सोनिया गांधी, शरद पवार और अजीत चव्हाण से यह पूछने के कि उनकी अकूत संपत्ति कहां से आई है, वे बाबा रामदेव से यह पूछ रहे हैं कि इस सत्याग्रह को करने के लिए पैसा कहां से आ रहा है? और बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को नेपाली नागरिक बताने वाले कांग्रेस के प्रवक्ता यह क्यों भूल जाते हैं कि उनकी पार्टी की अध्यक्ष भी भारतीय नहीं है। और जो दिग्विजय सिंह बाबा रामदेव को महाठग बता रहे हैं, उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि केंद्र सरकार के ४ मंत्री इस ठग से क्यों बात करने गए थे ?

यह तथ्य भी गौर करने लायक है कि जब से बाबा रामदेव ने सोनिया गांधी और मनमोहन सरकार पर उनको जान से मार डालने के षड़यंत्र रचने का आरोप लगाया है,और उन्हैं कुछ भी होने के लिए सोनिया गांधी को जिम्मेदार बताया है, तब से पूरी कांग्रेस पार्टी बजाय देश से माफी मांगने के सोनिया गांधी के बचाव में उतर आई है, और कांग्रेस के महामंत्री जनार्दन दिवेदी का यह कहना कि ‘‘सत्याग्रही मौत से बचने के लिए महिलाओं के कपडे पहनकर भागता नहीं है।’’ बाबा रामदेव के इस आरोप को पुष्ट ही करता है कि सरकार ने उनको मारने का षड़यंत्र रचा था।

लेकिन सरकार और कांग्रेस को इतिहास को एक बार खंगाल लेना चाहिये। उन्हैं यह याद रखना चाहिये कि भारत के नागरिकों का आत्मबल बहुत मजबूत है। जो भारत 1200 साल की गुलामी सहने के बाद भी अपना अस्तित्व बचाये रख सकता है। इंदिरा गांधी के कठोर आपातकाल को झेल सकता है, वह सत्ताधीशो की दमनकारी मानसिकता से डरने वाला नहीं है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री स्व0 जयनारायण व्यास द्वारा आज से 60 साल पहले लिखी गई यह कविता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा और चेतावनी हैं जो नागरिकों को सम्मान की निगाह से नहीं देखते।

‘‘ भूखे की सूखी हडडी से,

वज्र बनेगा महाभयंकर,

ऋषि दधिची को इर्ष्या होगी,

नेत्र तीसरा खोलेंगे शंकर,

जी भर आज सता ले मुझको,

आज तुझे पूरी आजादी,

पर तेरे इन कर्मो में छिपकर,

बैठी है तेरी बरबादी,

कल ही तुझ पर गाज गिरेगा,

महल गिरेगा, राज गिरेगा,

नहीं रहेगी सत्ता तेरी,

बस्ती तो आबाद रहेगी,

जालिम तेरे इन जुल्मों की,

उनमें कायम याद रहेगी।

अन्न नहीं है, वस्त्र नहीं है,

और नहीं है हिम्मत भारी,

पर मेरे इस अधमुए तन में

दबी हुई है इक चिंगारी

जिस दिन प्रकटेगी चिंगारी

जल जायेगी दुनिया सारी

नहीं रहेगी सत्ता तेरी,

बस्ती तो आबाद रहेगी,

जालिम तेरे इन जुल्मों की,

उनमें कायम याद रहेगी।

Source: http://www.pravakta.com/story/24208

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