"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

Regarding Baba Ram Dev


प्रिय बंधु,

vagabondindia

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व्यक्ति एवं समाज में सकारात्मक मौलिक परिवर्त्तन का मूल-मंत्र

प्रेषित लेख में आपका चिन्तन; वर्त्तमान समाज,राष्ट्र एवं संसार में व्याप्त बरवरता,शोषण,कुव्यवस्था और उनसे पीङित मानवता तथा अन्य प्राणी को निजात दिलाने के लिए, मौलिक निदान की ओर इंगित कर रहा है।

हमने गुलामी की मानसिकता में यह भ्रम पाल लिया है की पश्चिम की निजी, सामाजिक, राजनैतिक, न्यायिक,शैक्षनिक, आर्थिक या भौतिक चिन्तन और व्यवस्थाएँ ही विकास तथा संपन्नता का सही रास्ता है। परन्तु उससे उत्तपन्न अराजकता,व्यभिचार,शोषण,आतंक,अत्याचार, अशान्ति और विनाश की ओर हम सामान्य लोगों को कौन कहे दिग्गज चिन्तकों एवं सुधारकों का भी ध्यान नहीं जाता है।

किसी व्यक्ति,समाज या राष्ट्र का सही दिशा में मौलिक परिवर्त्तन , हमारे ऋषियों द्वारा हजारों वर्षों तक किए गए कठोर साधना से प्राप्त ज्ञान और अनुभूति को केवल रटने से नहीं, उनपर स्वयं चलने से ही संभव है । और इन पावन संस्कारों का प्रशिक्षण प्रज्ञावान संतों के द्वारा माँ के गर्भ में पल रहे संतान एवं वर्त्तमान समाज को देने की आवश्यकता है।

क्योंकि मानव चित्त में तामसिक एवं राजसिक गुणों के कारण जन्म –जन्मान्तरों से बनते आ रहे कुसंस्कारों और वर्त्तमान व्यवस्थाओं द्वारा फैलाए जा रहे कुसंस्कारों को भारत का सनातन आध्यात्मकि चिन्तन ही दूर कर सच्चा मानव बना सकता है। और इस दिशा में अनेक जागृत संतों द्वारा कार्य भी शुरू हो चुका है। हम विचारशील बुद्धिजीवियों को केवल उनका बौद्धिक समर्थन ही नहीं, नि:स्वार्थभाव से उन्हें जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यक्ता है।

हरि ऊँ

भोला भगत, 13-06-11

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