"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

बुखारी से!


प्रो. मधुसूदन
मधुसूदन उवाच

मधुसूदन –॥बुखारी जी से॥

(कविता)

आप की नमाज में “नम” धातु, है, “देव वाणी” का।
और “आमीन” हमारे ॐ का अपभ्रंश है।

“बिरादर” आपका, हमारा “भ्रातर” है।
“कारवाई” आपकी, हमारी “कार्यवाही” है।

मोहबत में भी मोह (प्रेम) भी तो, उधार हमारा है।

मक्का करते ही हो ना प्रदक्षिणा,
और काबा का पत्थर शालिग्राम है।

“मस्ज़िद” में “मस्ज” धातु यह मज्जन है।
“धोकर साफ़ करने” के अर्थ वाला,
प्रवेश पर “वज़ु” करते ही हो ना?

माँ को जब पुकारते हो “अम्मा”
वह “अम्बा” भी है, देव वाणी का,
“अम्बा माता”
तो क्या माँ को अम्मा पुकारना बंद करोगे?

क्यों डरते हो? इस वतन को , वंदन करते?
क्यों डरते हो “वन्दे मातरम” कहते?

हम मरेंगे, तो राख हो जाएंगे।
जल जाएंगे, खाक़ हो जाएंगे।
ऊड जाएंगे हवाओ में, चहुं ओर फैल जाएंगे।
अथवा जल में बह जाएंगे।

आप तो इस धरती में ही गड जाओगे,
युगो युगों तक,
कयामत तक,
चैनकी नींद सोओगे।

जिस धरती में सोओगे,
दाना, पानी, आसरा ले ज़िंदगी जियोगे
???????? क्या क्या कहें?
जिस “डाल” पर बांधा घोंसला ?
उसी को काटने वाले को क्या कहोगे?

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s