"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

ब्रहमेश्वर सिंह उर्फ बरमेसर मुखिया की हत ्या


बिहार में रणवीर सेना के संस्थापक माने जाने वाले ब्रहमेश्वर सिंह उर्फ बरमेसर मुखिया की अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर हत्या कर दी है.

मुखिया की मौत की ख़बर आते ही बवाल शुरु हो गया है और आरा शहर में क़ानून व्यवस्था की स्थित गंभीर बताई जा रही है.

जहां पर मुखिया को गोली मारी गई वहीं पास के एक हरिजन छात्रों के छात्रावास में आग लगा दी गई है और मुखिया के समर्थकों की भीड़ आरा की सड़कों पर जुट गई है.

आरा शहर में हालात बेकाबू होते देख स्थानीय प्रशासन ने वहां कर्फ्यू लागू कर दिया है. खबर मिल रही है कि शहर में कई जगहों पर मुखिया के समर्थकों ने आगजनी की है.

पटना के आला पुलिस अधिकारी आरा के लिए रवाना हो रहे हैं. अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात कर दिए गए हैं.

आरा स्टेशन पर पटना दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस पर पथराव भी किया गया है.

ब्रहमेश्वर सिंह बिहार का जाना माना नाम है और वो रणवीर सेना के कारण चर्चा में आए थे.

बिहार के जाति संघर्ष के दौर में ऊंची जातियों ने एक सेना का गठन किया था जिसे रणवीर सेना का नाम दिया गया था.

राज्य में अस्सी और नब्बे के दशक में हुए कई नरसंहारों में रणवीर सेना का हाथ माना जाता है.

हाल ही में ब्रहमेश्वर सिंह को बथानी टोला नरसंहार मामले में उस समय सज़ा नहीं हुई जब पुलिस ने कहा कि वो फरार हैं.

हालांकि उस समय मुखिया आरा जेल में थे. इस मामले में काफी विवाद हुआ था और मामला अभी भी कोर्ट में है.

ताजा जानकारी के अनुसार शुक्रवार तड़के अज्ञात हमलावरों ने ब्रहमेश्वर सिंह को गोली मार दी है.

यह घटना राज्य के आरा में हुई है जहां हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए और ब्रहमेश्वर सिंह को निशाना बनाया.

अभी ये स्पष्ट नहीं है कि किन लोगों ने मुखिया को गोली मारी है लेकिन आशंका है कि इसके पीछे पुरानी दुश्मनी एक कारण हो सकता है.

कौन थे ब्रह्मेश्वर मुखिया?

ब्रहमेश्वर सिंह उर्फ बरमेसर मुखिया बिहार की जातिगत लड़ाईयों के इतिहास में एक जाना मान नाम है.

भोजपुर ज़िले के खोपिरा गांव के रहने वाले मुखिया ऊंची जाति के ऐेसे व्यक्ति थे जिन्हें बड़े पैमाने पर निजी सेना का गठन करने वाले के रुप में जाना जाता है.

बिहार में नक्सली संगठनों और बडे़ किसानों के बीच खूनी लड़ाई के दौर में एक वक्त वो आया जब बड़े किसानों ने मुखिया के नेतृत्व में अपनी एक सेना बनाई थी.

सितंबर 1994 में बरमेसर मुखिया के नेतृत्व में जो सगंठन बना उसे रणवीर सेना का नाम दिया गया.

उस समय इस संगठन को भूमिहार किसानों की निजी सेना कहा जाता था.

इस सेना की खूनी भिड़ंत अक्सर नक्सली संगठनों से हुआ करती थी.

बाद में खून खराबा इतना बढ़ा कि राज्य सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था.

नब्बे के दशक में रणवीर सेना और नक्सली संगठनों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ की बड़ी कार्रवाईयां भी कीं

सबसे बड़ा लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार एक दिसंबर 1997 को हुआ था जिसमें 58 दलित मारे गए थे.

इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की जातिगत समस्या को उजागर कर दिया था. इस घटना में भी मुखिया को मुख्य अभियुक्त माना गया था.

ये नरसंहार 37 ऊंची जातियों की हत्या से जुड़ा था जिसे बाड़ा नरसंहार कहा जाता है. बाड़ा में नक्सली संगठनों ने ऊंची जाति के 37 लोगों को मारा था जिसके जवाब में बाथे नरसंहार को अंजाम दिया गया.

इसके अलावा मुखिया बथानी टोला नरसंहार में अभियुक्त थे जिसमें उन्हें गिरफ्तार किया गया 29 अगस्त 2002 को पटना के एक्सीबिजन रोड से. उन पर पांच लाख का ईनाम था और वो जेल में नौ साल रहे.

बथानी टोला मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा कि मुखिया फरार हैं जबकि मुखिया उस समय जेल में थे. इस मामले में मुखिया को फरार घोषित किए जाने के कारण सज़ा नहीं हुई और वो आठ जुलाई 2011 को रिहा हुए.

बाद में बथानी टोला मामले में उन्हें हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी.

277 लोगों की हत्या से संबंधित 22 अलग अलग आपराधिक मामलों (नरसंहार) में इन्हें अभियुक्त माना जाता थ. इनमें से 16 मामलों में उन्हें साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था. बाकी छह मामलों में ये जमानत पर थे.

जब वो जेल से छूटे तो उन्होंने 5 मई 2012 को अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के नाम से संस्था बनाई और कहते थे कि वो किसानों के हित की लड़ाई लड़ते रहेंगे.

जब मुखिया आरा में जेल में बंद थे तो इन्होंने बीबीसी से इंटरव्यू में कहा था कि किसानों पर हो रहे अत्याचार की लगातार अनदेखी हो रही है.

मुखिया का कहना था कि उन्होंने किसानों को बचाने के लिए संगठन बनाया था लेकिन सरकार ने उन्हें निजी सेना चलाने वाला कहकर और उग्रवादी घोषित कर के प्रताड़ित किया है.

उनके अनुसार किसानों को नक्सली संगठनों के हथियारों का सामना करना पड़ रहा था.

One response

  1. Bhumihar

    Great man who fought for week people.
    We salute Brameshwar Ji Mukhiya.

    June 1, 2012 at 11:11 AM

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