"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

राजनीत के ये कैसे फंडे हैं?


राजनीत के ये कैसे….फंडे हैं,
हर हाथ में कितने…. डंडे हैं !
सर को तो फिरा कर देख जरा,
जाने…किस किसके.. झंडे हैं !!

कितना हैं घिनौना खेल यहाँ,
धुर विरोधियों का..मेल यहाँ !
कल तक न सुहाते फूटी आँख,
अब मिलके बिलौते तेल यहाँ !!

अब एक ही झंडा सर पर हैं,
जो मेरा तुझको… अर्पण हैं !
वोटर तो बेचारा..काठ का हैं,
उसका जीते जी….. तर्पण है !!

सौ सौ पर भारी…नेता यहाँ,
छुटभैय्ये बने हैं…खेता यहाँ !
सर झुका दंडवत…चरणों में,
भ्रम ,कलयुग हैं या त्रेता यहाँ !!

फिर पाँच बरस का मेला है,
पर वोटर निपट…अकेला हैं !
विश्वास, ईमान कि कौन कहे,
बस तिकड़म का ये खेला हैं !!

दलबदलुओं कि हैं जमात यहाँ,
गिरगिट भी मांगे पनाह यहाँ !
बटती जूतों में दाल हर तरफ,
टिकट की हैं बस, चाह यहाँ !!

अब कहो मित्र किसको मत दें,
तुम रहनुमा हो किसको कह दें !
हर बार छला हैं…जनता को ,
क्यों वोट करे क्यों फिर शह दें !!

वो बूथ लुटा क्या जनमत है,
गोली कट्टों की…दहशत है !
है कौन यहाँ जिसका भय हो,
हे लोकतंत्र…… तेरी जय हो !! हे लोकतंत्र …..तेरी जय हो !! हे लोकतंत्र …..तेरी जय हो !!

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