"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

जाने कैग क्या है?


इतने दिनों से जिसकी रिपोर्ट की वज़ह से संसद से लेकर सड़क तक हो हल्ला है, आइये जाने वो CAG (कैग) आखिर है क्या ? और उसका काम क्या है ?

"नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक" (CAG) पहली बार चर्चा में नहीं है। सबसे पहले कैग का हर जुबान पर नाम आया था बोफोर्स के मुद्दे पर उस समय स्वीडिश रेडिओ ने खबर दी थी बोफोर्स तोप सौदे में 64 करोड़ रूपये दलाली ली गई है। जब कैग की रिपोर्ट आई तब बोफोर्स मामले में विपक्ष के आरोपों की पुष्टि हुई। एक बात बता दूँ रिपोर्ट में नाम नहीं होता कैग की छानबीन तकनीकी होती है…..व्यक्तियों की छानबीन नहीं होती।

कैग के सामने जो कागजात रखे जाते हैं उसमें जो वर्णन होता है उसमें सही प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं अपनाई गई यह पता चलता है। कैग ने बताया बोफोर्स में सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई उस समय कैग के पद पर टी॰एन॰ चतुर्वेदी थे जिनकी संसद में खूब चर्चा हुई। सत्ता पक्ष ने चतुर्वेदी की आलोचना की और कहा उन्होंने मर्यादाएं तोड़ी हैं।

अभी जो हो रहा है कैग की परंपरा में कोई नयी बात नहीं है…..सरकारी खजाने में जो पैसा खर्च हो रहा है, वह क्या सही और जिनको लाभ मिलना चाहिय उन्हें वो लाभ मिल रहा या नहीं इसकी जांच बारीकी से कैग करता है। कैग बजट की छानबीन भी करता है खासकर राजस्व की….. कैग की रिपोर्ट के बारे में ये मानते हैं कि कैग तकनीकी और आर्थिक पैरामीटर के आधार पर रिपोर्ट तैयार करती है। उसकी रिपोर्ट में कोई पैरा संसद की लोकलेखा समिति उठाती है और छानबीन करती है, लोक लेखा समिति कैग को भी गवाही के लिए बुलाती है, मंत्रालय के सचिव को भी बुलाती है और प्रधानमंत्री को भी बुला सकती है। हालांकि प्रधानमन्त्री को आज तक बुलाया नहीं गया छानबीन के बाद लोकलेखा समिति अपनी रिपोर्ट देती है इस रिपोर्ट को संसद स्वीकार करती है और सरकार को कार्यवाही करनी पड़ती है…..सरकार को ये भी बताना पड़ता है कि क्या कार्यवाही की गई ?

कैग परदे के पीछे से सरकार पर नज़र रखने का काम करती है…..अब संसद और सुप्रीम कोर्ट के समानांतर कैग का स्थान जनमानस में बन गया है। कैग के खुलासों का उसकी ऐसी छवि बनाने में बड़ा योगदान है। कैग का महत्त्व आज भी महत्त्व पहले सा है। 1950 में जब लोकसभा का सचिवालय बनना शुरू हुआ, उसमें करीब करीब सभी लोग कैग से ही लिए गए थे, लोकसभा के पहले सेक्रेटरी महेश्वर नाथ कौल से पूछा गया तो उन्होंने कहा नौकरशाह राजनीतिक दलों के दबाब में आ सकते हैं लेकिन कैग के कर्मचारी किसी के दबाब में काम नहीं करते।

वर्तमान कैग ‘विनोद राय जी’ पर टिप्पणी करके दिग्विजय सिंह ने संविधान का अपमान किया है। संवैधानिक संस्था और उसके प्रमुख को अपमानित करने पर क्या काँग्रेस दिग्गी पर कार्यवाही करेगी ?? ये काँग्रेस की परंपरा बनती जा रही है जो भी उसके पापों को उजागर करेगा उसे बदनाम किया जाएगा…चाहे वो बाबा रामदेव, अन्ना हज़ारे जैसे साधारण व्यक्ति हों या कैग जैसी संवैधानिक संस्था।

विनोद राय जी देश आपके साथ है !!

One response

  1. CAG HI JO SARKAR KI GALTIYO KA UJAGAR KARNE KA KAMKARTI HAI—-THANKS CAG

    November 27, 2012 at 9:42 AM

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