"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

भावनाओं से ऊपर उठकर इसके साथ जरा यह भी सोचि ये


जो नेता यह वकालत करते हैं कि कोई भी भारतीय इस देश में कहीं भी जाकर रह सकता है वह भारतवासियों के कश्मीर में जाकर बसने की वकालत क्यों नहीं करते ? कश्मीर भी तो भारत का अंग है फिर वहाँ धारा 370 क्यों लगी है?
आप को उन धर्मनिरपेक्ष नेताओं की दोगली नीति समझ आ जायेगी।

हमारे संविधान में हर राज्य को अपनी अलग शिक्षानीति, आंतरिक सुरक्षा नीति तथा पिछडी जातियों के लिये अवसर सुरक्षित की नीति बनाने का प्रावधान है जो राज्य के उन लोगों पर लागू होता है जो निर्धारित समय तक उसी राज्य में रहते रहे हों। यदि देश एक है तो सभी राज्यों में एक समान शिक्षा नीति और विकास के अवसर होने चाहियें लेकिन वैसा क्यों नहीं है ? सभी देशवासियों के लिये समान अचार संहिता और सामान्य कानून क्यों नहीं हैं ?

अब होता यह है कि जो राज्य अपने भ्रष्ट नेताओं के कारण अपने राज्यों को विकसित नहीं कर पाये उन्हीं के राज्यों से रोजी रोटी के लिये कुछ लोग दूसरे अधिक विकसित राज्यों में भटकने के लिये चले जाते हैं। अगर यह लोग उन विकसित राज्यों में जाकर मकान खरीदें या किसी नौकरी पर जायें तो इस में कोई अपत्ति नहीं होनी चाहिये। लेकिन अगर वह विकसित राज्यों में जा कर सड़कों पर डेरा डाल दें, वहाँ का बिजली-पानी मुफ्त में इस्तेमाल करें और स्थानीय लोगों के अवसर भी हडप लें तो इस पर अपत्ति होना स्वाभाविक है।

इतना ही नहीं, यह लोग जब दूसरे राज्यों में डेरा डाल लेते हैं तो उनके समर्थन
में अविकसित राज्यों के बेशर्म नेता बयानबाजी करने लगते हैं जिस कारण उन
बेशर्म नेताओं का एक निजी वोटबैंक विकसित राज्य में पनपने लगता है। धीरे धीरे हालत इतनी बिगड जाती है कि स्थानीय लोग अपने ही राज्य के स्थानीय नेताओं को चुनाव में नहीं चुन सकते।

ऐसा दिल्ली, मुम्बई और पंजाब में हो रहा है। बंग्लादेशी घुसपैठिये भी भारत
में यही कुछ कर रहै हैं और लोकल लोगों को त्रासित होना पड रहा है।

नितिश कुमार और लालू यादव जैसे नेताओं को बिहारियों के अपमान पर गुस्सा आता है लेकिन इस बात पर शर्म नहीं आती जब उन्हीं के राज्यों के लोग छोटी मोटी मजदूरी करने के लिये दूसरे राज्यों में दर दर की ठोकरें खाते हैं। नितीश कुमार और लालू यादव अपनी तुलना यहाँ नरेन्द्र मोदी के साथ करें और देखें कितने गुजराती बिहार में मजदूरी करने के लिये जाते हैं।

– चंद कुमार शर्मा

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