"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

रावण जैसा भाई


गर्भवती माँ ने बेटी से पुछा: ” क्या चाहिये तुझे बहन या भाई?”
बेटी बोली: ” भाई”
माँ : “किसके जैसा?”
बेटी: “रावण सा…”
माँ: “क्या बकती है?

पिता ने धमकाया, माँ ने घूरा, गाली देती है??

बेटी बोली: “क्यों माँ?”

‘बहन के अपमान पे राजवंश लुटा देनेवाला,
शत्रु स्त्री को हरण करने के बाद भी स्पर्श ना करने वाला.
रावण जैसा ही भाई तो चाहिये आज हर लड़की को.’

माँ सिसक रही थी, पिता अवाक था.

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3 responses

  1. Sudha ji, ery very nice poem… kitni bhi tareef kare , kum hai… Bahut zaroorat hai aisi kavitao ki….
    where is the link? I cant see… pls mailme : saxenadeepali2001@yahoo.co.in

    August 20, 2013 at 5:59 PM

  2. बहुत बहुत धन्यबाद…. मैने लिंक भी डाल दिया है, ताकि पूरी कविता वँहा पढी जा सके.
    – प्रफुल्‍ल

    January 15, 2013 at 6:49 PM

  3. मेरी इस कविता को प्रकाशित करने के लिए धन्यवाद। 1998 में लिखी यह कविता अभी भी दुर्भाग्य से उतनी ही समसामयिक है।
    सुधा शुक्ला
    http://hamkahlina.blogspot.in

    January 15, 2013 at 6:37 PM

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