"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

सुभाष चन्द्र बोस


सुभाषचन्द्र बोस (बांग्ला: সুভাষ চন্দ্র বসু शुभाष चॉन्द्रो बोशु) (23 जनवरी 1897 – 18 अगस्त, 1945 विवादित) जो नेताजी नाम से भी जाने जाते हैं, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा, भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया हैं।

१९४४ में अमेरिकी पत्रकार लुई फिशर से बात करते हुए, महात्मा गाँधी ने नेताजी को देशभक्तों का देशभक्त कहा था। नेताजी का योगदान और प्रभाव इतना बडा था कि कहा जाता हैं कि अगर उस समय नेताजी भारत में उपस्थित रहते, तो शायद भारत एक संघ राष्ट्र बना रहता और भारत का विभाजन न होता। स्वयं गाँधीजी ने इस बात को स्वीकार किया था।

“तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा। खून भी एक-दो बूंद नहीं, इतना कि खून का एक महासागर तैयार हो जाए और मैं उसमें ब्रिटिश साम्राज्य को डूबो दूं।”

“यदि स्वदेशाभिमान सीखना है तो सीखो एक मछली से जो स्वदेश (पानी) के लिये तडप तडप कर जान दे देती है।”

Subhas_Chandra_Bose

अभी वतन आजाद नही, आजाद हिंद तू फ़ौज बना,
श्रम करके संध्या को घर में, अपने बिस्तर पर आया था,
उस दिन ना जाने क्यों मैंने, मन में भारीपन पाया था।

जब आँख लगी तो सपने में लहराता तिरंगा देखा था,
राष्ट्र ध्वजा की गोद लिए, भारत माँ का बेटा था।

जय हिंद का नारा बोल बोल के आकर वह चिल्लाये थे,
उस रात स्वंय बाबू सुभाष, मेरे सपने में आये थे।

बोले भारत भूमि में जन्मा है, तू कलंक क्यों लजाता है,
राग द्वेष की बातो पर, क्यों अपनी कलम चलाता है।

इन बातों पर तू कविता लिख, मै विषय तुम्हें बतलाता हूँ,
वर्तमान के भारत की मैं, झांकी तुझे दिखाता हूँ।

हमने पूनम के चंदा को राहू को निगलते देखा है,
हमने शीतल सरिता के पानी को उबलते देखा है।

गद्दारों की लाशों को चन्दन से जलते देखा है,
भारत माता के लालों को शोलों पर चलते देखा है।

देश भक्त की बाहों में सर्पों को पलते देखा है,
हमने गिरगिट सा इंसानों को रंग बदलते देखा है।

जो कई महीनों से नहीं जला हमने वो चूल्हा देखा है,
हमने गरीब की बेटी को फाँसी पर झूला देखा है।

हमने दहेज़ बिन ब्याही बहुओं को रोते देखा है,
मजबूर पिता को गर्दन बल पटरी पर सोते देखा है।

देश द्रोही गद्दारों के चहरे पर लाली देखी है,
हमने रक्षा के सौदों में होती हुई दलाली देखी है।

subhas_chandra_bose

खादी के कपड़ो के भीतर हमने दिल काला देखा है,
इन सब नमक हरामों का, शेयर घोटाला देखा है।

हमने तंदूर में नारी को रोटी सा सिकते देखा है,
लाल किले के पिछवाड़े, अबला को बिकते देखा है।

राष्ट्रता की प्रतिमाओं पर, लगा मकड़ी का जाला देखा है,
जनपद वाली बस्ती में हमने कांड हवाला देखा है।

आतंकवाद के कदमों को इस हद तक बढ़ते देखा है,
अमरनाथ में शिव भक्तों को हमने मरते देखा है।

होटल ताज के द्वारे, उस घटना को घटते देखा है,
माँ गंगा की महाआरती में, बम फटते देखा है।

हमने अफजल की फाँसी में संसद को सोते देखा है,
जो संसद पर बलिदान हुए, उनका घर रोते देखा है।

उन सात पदों के सूरज को भारत में ढलते देखा है,
नक्शलवाद की ज्वाला में, मैंने देश को जलते देखा है।

आजादी के दिन दिल्ली, बन गई दुल्हनिया देखी है,
15 अगस्त के दिन भोलू की भूखी मुनिया देखी है।

हमने संसद के अन्दर राष्ट्र की भ्रष्टाचारी देखी है,
हमने देश के साथ स्वयं, होती गद्दारी देखी है।

ये सारी बातें सपने में नेता जी कहते जाते थे,
उनकी आँखों से झर झर आंसू भी बहते जाते थे।

बोले जा बेटे भारत माता के, अब तू सोते लाल जगा,
अभी वतन आजाद नही, आजाद हिंद तू फ़ौज बना।

जय भारत, जय हिन्द, जय सुभाष !

Bose_Gandhi_1938

23 जनवरी यानि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म-दिवस है । आज़ाद हिंद फौज के इस सेनानी को नमन । भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महत्वपूर्ण स्वर्णिम अध्याय को लिखते हुए “आज़ाद हिंद फौज” का गठन किया 7000 सैनिकों के साथ । इसके बाद ही उनको “नेताजी” का नाम मिला । ” तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आज़ादी दूंगा ” का नारा देने वाले सुभाष ने दिया “दिल्ली चलो” का जोशीला नारा और आज़ाद हिंद फौज ने जापानी सेना की सहायता से अंडमान निकोबार पहुँच कर देश को अंग्रेजी दासता से मुक्त कराने का प्रथम चरण पूरा किया और इन द्वीपों को “शहीद” तथा “स्वराज” नाम प्रदान किये ।

मित्रों, “गुलाम भारत” में जब सन् 1922 में जब ‘नेताजी सुभाष चन्द्र बोस’ को कोलकाता की महापालिका का प्रमुख कार्यकारी अधिकारी बनाया गया तो नेताजी ने कोलकाता महापालिका का पूरा ढाँचा और काम करने का तरीका ही बदल डाला।

उन्होनें सबसे पहले कोलकाता के रास्तों के ‘अंग्रेज़ी नाम’ बदलकर, उनका ‘भारतीय’ नामों से नामकरण किया…………….लेकिन दुर्भाग्य से आज “आज़ाद भारत” में आज़ादी के 66 वर्ष बाद भी देश में अंग्रेजों के नाम पर शहर (डलहौज़ी शहर, वास्को डी गामा, लेंसडाउन आदि) बसे हुए हैं। हजारों इमारतों, गलियों, पार्कों और चौराहों के नाम क्रूर अंग्रेजों के नाम पर चल रहे हैं।

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