"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

संकल्प की शक्ति


*लंदन की एक बस्ती में* एक अनाथ बालक रहता था। वह अखबार बेचकर किसी तरह अपना गुजारा करता था। जब यह काम उसके हाथ से निकल गया, तो उसे एक जिल्दसाज की दुकान पर जिल्द चढ़ाने का काम मिल गया। उसे पढ़ने का बहुत शौक था। वह पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाते समय उनकी महत्वपूर्ण बातों व जानकारियों को ध्यान से पढ़ता रहता था।

एक दिन जिल्द चढ़ाते समय उसकी नजर विद्युत संबंधी एक लेख पर पड़ी। वह लेख उसे बहुत ही मनोरंजक लगा। वह उससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने दुकान के मालिक से पुस्तक मांग ली और रात भर में उस लेख के साथ ही पूरी पुस्तक भी पढ़ डाली। इससे विद्युत संबंधी प्रयोग करने में उसकी जिज्ञासा बढ़ती गई और धीरे-धीरे वह प्रयोग एवं परीक्षण के लिए विद्युत संबंधी छोटी-मोटी चीजें जुटाने भी लगा। लोग उसकी प्रतिभा के कायल होते जा रहे थे। एक ग्राहक तो उससे बहुत ही प्रभावित हुआ। उसने तय किया कर लिया कि वह बालक को आगे बढ़ने में हरसंभव मदद करेगा।

वह एक दिन उसे अपने साथ भौतिकशास्त्र के प्रसिद्ध विद्वान डेवी का भाषण सुनवाने ले गया। बालक ने डेवी की बातें ध्यान से सुनीं और उन्हें नोट भी किया। इसके बाद बालक ने उनके भाषण की समीक्षा करते हुए अपने परामर्श लिखकर डेवी के पास भेज दिए। डेवी को बालक के सुझाव बहुत पसंद आए। उन्होंने उसे यंत्रों को व्यवस्थित करने के लिए अपने पास रख लिया। बालक उनके सहयोगी और नौकर दोनों की भूमिका निभाता रहा। वह दिन भर अपने कामों में व्यस्त रहता, रात को अध्ययन करता। थकान होने पर भी उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं आती थी। वह भौतिकी के क्षेत्र में कुछ असाधारण करने का संकल्प ले चुका था। वह दिन-रात अध्ययन और शोध में लगा रहता था। वह बाधाओं की तनिक भी परवाह नहीं करता था। यह बालक आगे चलकर माइकल फैराडे के नाम से विश्वविख्यात हुआ।

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