"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

संसद हमला: अफजल गुरु को फांसी


संसद हमला: अफजल गुरु को फांसी पर लटकाया गया
संसद हमला: अफजल गुरु को फांसी पर लटकाया गया

नई दिल्ली।। संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी पर लटका दिया गया है। उसे शनिवार 8 बजे फांसी पर लटकाया गया। हालांकि, कुछ सूत्रों का कहना है कि अफजल को शनिवार तड़के 5.25 बजे ही फांसी दे दी गई थी। फांसी देने के बाद सुबह करीब 9 बजे उसे तिहाड़ जेल के अंदर ही इस्लामिक रीति-रिवाज के साथ दफना दिया गया है। अफजल को फांसी दिए जाने की सूचना शुक्रवार की शाम 5 बजे ही दे दी गई थी। अंतिम इच्छा के रूप में उसने कुरान की प्रति मांगी थी।

अफजल को फांसी पर लटकाने के तुरंत बाद ही कश्मीर घाटी में कर्फ्यू लगा दिया गया। पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली और मुंबई में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। गौरतलब है कि प्रेजिडेंट प्रणव मुखर्जी ने 3 फरवरी को ही उसकी दया याचिका ठुकरा दी थी। हुर्रियत ने कश्मीर में 3 दिन के बंद का ऐलान किया है।

सरकार ने शनिवार को आतंकवादियों और पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को शनिवार सुबह फांसी पर लटका दिया गया। उसे दिल्ली के तिहाड़ जेल के जेल नंबर 3 में फांसी पर लटकाया गया। डॉक्टरों ने सुबह 8.10 बजे अधिकारिक रूप से अफजल की मौत की घोषणा की। बाद में उसे तिहाड़ जेल के अंदर ही दफना दिया गया।

शुक्रवार की देर शाम गृह मंत्रालय की बैठक में ही अफजल को फांसी पर लटकाने का फैसला लिया गया था। इसके पहले राष्ट्रपति ने अफजल गुरु की दया याचिका को रिजेक्ट कर दिया था। प्रेजिडेंट भवन के प्रवक्ता वेणु राजामणि ने बताया कि अफजल गुरु की दया याचिका 3 फरवरी को खारिज कर दी गई थी।

गौरतलब है कि अफजल दिसंबर 2001 में संसद पर हुए हमले की साजिश रचने का दोषी था और सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में उसे फांसी की सजा सुनाई थी।

13 दिसंबर 2001 को भारी हथियारों से लैस 5 आतंकवादी संसद परिसर में घुस गए थे और अंधाधुंध गोलीबारी कर 9 लोगों को मार डाला था। मरने वालों में दिल्ली पुलिस के 5 सुरक्षाकर्मी, सीआरपीएफ की एक महिला सुरक्षाकर्मी, संसद के वाच ऐंड वॉर्ड स्टाफ के 2 कर्मचारी और एक माली शामिल थे। बाद में हमले में घायल एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। साथ ही सभी पांचों आतंकवादियों को भी मार गिराया गया था।

तिहाड़ जेल में दफनाया गया
सुबह करीब 9 बजे इस्लामिक रीति-रिवाज से अफजल गुरु को तिहाड़ जेल कैंपस में ही दफना दिया गया। अफजल को शुक्रवार शाम ही बता दिया गया था कि उसे अगले दिन 8 बजे फांसी दी जाने वाली है। शनिवार सुबह फांसी घर के पास ही एक कब्र खोदी गई, हालांकि, उस जगह को पहचाना नहीं जा सकेगा। जैसे ही फांसी के बाद डॉक्टरों ने अफजल को मृत घोषित किया, उसके शव को दफना दिया गया। इस दौरान धार्मिक रीति-रिवाजों का पूरा ख्याल रखा गया। दफनाने से पहले नमाज-ए-जनाजा भी पढ़ी गई।

हुर्रियत ने कश्मीर में 3 दिन के बंद का ऐलान किया
आतंकवादी अफजल गुरु की फांसी की सजा के बाद कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने 3 दिन के बंद का ऐलान किया है। पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। कश्मीर में केबल, मोबइल फोन सब बंद कर दिया गया है। अगले आदेश तक कश्मीर घाटी में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

3 फरवरी को ही दया याचिका ठुकरा दी गई थी
प्रेजिडेंट मुखर्जी ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की दया याचिका 3 फरवरी को ही ठुकरा दी थी, जिसके बाद शनिवार को उसे फांसी पर लटका दिया गया। केंद्रीय गृह सचिव आर. के. सिंह ने यह जानकारी दी। सिंह ने कहा कि प्रेजिडेंट ने 3 फरवरी को अफजल गुरू की दया याचिका को नामंजूर कर दिया था और उसके बाद हमने जेल के नियम कायदों की पड़ताल की और आज उसे फांसी दे दी गई।

अफजल के घरवालों को स्पीड पोस्ट से भेजी थी खबर
केंद्र सरकार ने कहा कि संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के बारे में उसके परिवार को तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने स्पीड पोस्ट के जरिए सूचित किया और उसे फांसी पर लटकाए जाने से पहले जम्मू-कश्मीर सरकार को भरोसे में ले लिया गया था। केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने कहा कि तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने परिवार को स्पीड पोस्ट, रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए सूचित किया और जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक से यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि परिवार को यह डाक मिली या नहीं।

फांसी से पहले नमाज अदा की
शुक्रवार की शाम 5 बजे ही अफजल को फांसी के बारे में बता दिया गया था और उसकी अंतिम इच्‍छा भी पूछ ली गई थी। उसने अंतिम इच्‍छा के रूप में ‘कुरान’ की एक प्रति मांगी थी। उसके पास इसकी एक प्रति पहले से थी, लेकिन अंतिम इच्‍छा के तौर पर भी उसने यही मांग की। उसे यह मुहैया करा दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक, फांसी से पहले अफजल ने नमाज अदा की।

कौन था अफजल गुरु
जम्‍मू और कश्‍मीर के बारामूला जिले का रहने वाला अफजल गुरु वारदात के समय एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। आईएएस की परीक्षा की तैयारी करने वाला अफजल बाद में जम्‍मू-कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट का सदस्‍य बना और वहीं से उसने आतंकी ट्रेनिंग ली। मूल रूप से कश्मीर के सोपोर का रहने वाला अफजल अपने काम के सिलसिले में तारिक नाम के शख्‍स से मिला, जिसने उसे जिहाद के लिए उकसाया। बाद में तारिक ने ही उसे पाकिस्‍तान स्थित गाजियाबाद में अन्‍य आतंकियों से मिलाया। वहां पर अफजल को फिदाइन हमले की ट्रेनिंग दी गई।

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