"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

तिनका तिनका


एक तिनका कहीं भी पड़ा हो उसका कोई अस्तित्व (वजूद) नहीं होता है |

एक तिनका सर्वथा उपेक्षित होता है एवं उसे उठा कर कचरा पात्र में डाल दिया जाता है |

परन्तु यदि ५० अथवा १०० तिनके मिल जाएँ आपस में मिल कर बंध जाएँ तो वे एक झाड़ू बन जाते हैं और गंदगी की सफाई के काम में आते हैं |

भारतीय संस्कृति में झाड़ू को पैर लगाना वर्जित है अर्थात सफाई करने वाले का अपमान वर्जित है |

भारत के कई प्रान्तों में दीपावली के त्योंहार पर घर को झाड़ू लगा कर स्वच्छ करने का कार्य गृह स्वामिनी अथवा पुत्र-वधू के हाथों संपन्न किया जाता है |

सफाई किसी भी प्रकार की हो सकती है मानसिक शारीरिक राजनीतिक इत्यादि सफाई तो हर दिन होनी चाहिए |

गंदगी को साफ करने के लिए आपसी क्षुद्र मतभेद सदैव के लिए त्याग कर (भुला देने से दुबारा याद आ जाते हैं) एकमत एवं एकजुट हो कर झाड़ू बनने के अलावा अन्य कोई उपाय नहीं है |

झाड़ू के सन्दर्भ में एक महत्वपूर्ण तथ्य ध्यानाकर्षण हेतु : झाड़ू को लाँघ कर (उल्लंघन ऊपर से जाना) भी वर्जित है |

अर्थात जो सफाई कर रहा है उसकी बात को अथवा उसके कार्य को लाँघ कर जाना (ओवर राइडिंग द डिसीजन्स) मना है |

या तो जल्दी से झाड़ू बन जाओ या फिर इतिहास के (जो पहले ही कचरे से भरा हुआ है) कचरा पात्र में चले जाओगे सोच लो |

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