"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

जलियावाला बाग़ हत्याकांड


न भूलेंगे जलियावाला, न भूलेंगे जनरल डायर, न भूलेंगे शहीद उधम सिंह !

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियावाला बाग़ में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर ने अपने 90 ब्रिटिश सैनिकों के साथ बाग को घेरकर निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों पर गोलियां बरसा दी थीं। 10 मिनट में 1650 राउंड गोलियां चलीं। पूरे घटनाक्रम में सैकड़ों लोगों को मार डाला था। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है। ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है जिनमें से 337 पुरुष, 41 नाबालिग लड़के और एक 6-सप्ताह का बच्चा था। अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए थे।

जब जलियांवाला बाग में यह हत्याकांड हो रहा था, उस समय उधमसिंह वहीं मौजूद थे और उन्हें भी गोली लगी थी। उन्होंने तय किया कि वह इसका बदला लेंगे। 13 मार्च 1940 को उन्होंने लंदन के कैक्सटन हॉल में इस घटना के समय पंजाब के ब्रिटिश लेफ़्टिनेण्ट गवर्नर मायकल- ओ- डायर को गोली चला के मार डाला। ऊधमसिंह को 31 जुलाई 1940 को फाँसी पर चढ़ा दिया गया। इस हत्याकांड ने तब 12 वर्ष की उम्र के भगत सिंह की सोच पर भी गहरा प्रभाव डाला था। इसकी सूचना मिलते ही भगत सिंह अपने स्कूल से 12 मील पैदल चलकर जालियावाला बाग पहुंच गए थे।

जलियावाला बाग़ कांड के शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि !

न भूलेंगे जलियावाला, न भूलेंगे जनरल डायर, न भूलेंगे शहीद उधम सिंह ! 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियावाला बाग़ में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर ने अपने 90 ब्रिटिश सैनिकों के साथ बाग को घेरकर निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों पर गोलियां बरसा दी थीं। 10 मिनट में 1650 राउंड गोलियां चलीं। पूरे घटनाक्रम में सैकड़ों लोगों को मार डाला था। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है। ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है जिनमें से 337 पुरुष, 41 नाबालिग लड़के और एक 6-सप्ताह का बच्चा था। अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए थे। जब जलियांवाला बाग में यह हत्याकांड हो रहा था, उस समय उधमसिंह वहीं मौजूद थे और उन्हें भी गोली लगी थी। उन्होंने तय किया कि वह इसका बदला लेंगे। 13 मार्च 1940 को उन्होंने लंदन के कैक्सटन हॉल में इस घटना के समय पंजाब के ब्रिटिश लेफ़्टिनेण्ट गवर्नर मायकल- ओ- डायर को गोली चला के मार डाला। ऊधमसिंह को 31 जुलाई 1940 को फाँसी पर चढ़ा दिया गया। इस हत्याकांड ने तब 12 वर्ष की उम्र के भगत सिंह की सोच पर भी गहरा प्रभाव डाला था। इसकी सूचना मिलते ही भगत सिंह अपने स्कूल से 12 मील पैदल चलकर जालियावाला बाग पहुंच गए थे। जलियावाला बाग़ कांड के शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि !

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