"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

बलात्कार और दिल्ली पुलिस


कृपया इस ताजा रेट चार्ट को पूरा करने में सहयोग दीजिये :
गरीब आदमी की ५ वर्ष की बच्ची का बलात्कार का मामला रफादफा करने और चुप रहने की रेट २००० रुपये है ।

१. गणित के ऐकिक नियम के अनुसार ५ वर्ष के बाद १५ वर्ष (*) तक की गरीब आदमी के परिवार की बच्चियों का बलात्कार का मामला रफादफा करने और चुप रहने की रेट क्या होगी ?

(*) १५ वर्ष के बाद १६ वां वर्ष लगने वाले दिन ही – हुक्मरान कहते हैं कि गरीब की बच्चियों को इतनी समझ आ जाती है कि वे बलात्कार को सहमति से यौन सम्बन्ध कहने के लिए बाध्य की जा सकती हैं !!!

२. गणित के ऐकिक नियम के अनुसार ५ वर्ष के बाद १५ वर्ष (*) तक की हुक्मरानों या अमीर लोगों के (**) परिवार की बच्चियों का बलात्कार का मामला रफादफा करने और चुप रहने की रेट क्या होगी ?

(***) इस प्रश्न का उत्तर बहुत कठिन है क्योंकि हुक्मरानों या अमीर लोगों के परिवार की बच्चियों का बलात्कार होता ही नहीं है – कभी सुना है क्या ?

By: Anand G. Sharma

यदि लोग देश, राजनीति, धर्म, समाज आदि पर बात कर सकते हैं तो फिर सेक्‍स को टैबू क्‍यों बना रखा है? इंसान की एक मात्र मूल ऊर्जा ‘काम ऊर्जा’ है, जिसके प्रति समाज ने इतनी कुंठा पाल ली है कि वह कब अपराध का शक्‍ल इख्तियार कर लेता है पता ही नहीं चलता! पुरानी कहावत है, ”जिस दरवाजे पर ‘झांको मत’ की तख्‍ती लगी हो, वहां लोग सबसे अधिक झांकते हैं।” आज यही वजह है कि पांच साल की बच्‍ची से लेकर 80 साल की बुजुर्ग तक से बलात्‍कार हो रहा है…। मीडिया, सरकार और समाज बलात्‍कार पर बहस कर रहे हैं, उसके प्रति शर्मिदगी जाहिर कर रहे हैं, लेकिन उसके मूल कारणों को खोज कर उसे दूर करने की कहीं कोई कोशिश ही नहीं दिखती है। यही कारण है कि बलात्‍कार पर एक बहस खत्‍म होती नहीं कि दूसरी बलात्‍कार की घटना तुरंत सामने आ जाती है! बलात्‍कार जैसे यौन हिंसा की सिर्फ और सिर्फ एक वजह है, और वह है- ‘व्‍यक्ति और समाज के मन में सेक्‍स को लेकर काफी गहराई में व्‍याप्‍त कुंठा।’ समाज इस पर बात करने को लेकर सहज नहीं है इसलिए इस समाज में रहने वाले लोग सेक्‍स के प्रति असहज वृत्ति अपनाते हैं और यौन हिंसा का व्‍यवहार करते हैं।

By: Sundeep Dev

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