"Everybody is a genius. But if you judge a fish by its ability to climb a tree, it will live its whole life believing that it is stupid." – Albert Einstein

मोदी देश का दुर्भाग्य या सौभाग्य ?


इतिहास के पन्नो पर खुद को दर्ज करने की जल्दबाजी में प्रधानमंत्री जी ने कई सवालों को जन्म दे दिया ! भ्रष्टाचार के छींटे जो उनके सफ़ेद कुर्ते पर भी नजर आ रहे है उनके बारे मे सफाई देते हुए तो उन्हें इतिहास का सहारा लेना पड़ा लेकिन मोदी को देश का दुर्भाग्य बताने में उन्हें जरा भी वक्त नहीं लगा ! नया प्रधानमंत्री कोई और होगा यह कहने में उनके चेहरे पर जरा सी सलवटे नजर आयी मगर नरेंद्र मोदी को देश के लिए घातक कहने में वो जरा भी नहीं हिचकिचाएं! रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कार सी सरकार के मुखिया के रूप में न तो उन्होंने घोटाले, महंगाई, भ्रष्टाचार, बेकारी , बदहाली, असुरक्षा की जिम्मेदारी ली न उस पर कोई चिंता व्यक्त की, न देश के विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के लिए उनकी नाकामियों को जिम्मेदार समझा ! उन्होंने मान लिया कि देश का अगला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे जो उनके विचार से देश के लिए घातक होगा !

प्रधानमंत्री पद पर होते हुए भी निवर्त्तमान प्रधानमंत्री सी बातें कर उन्होंने देश की जनता को एक बार फिर निराश किया ! देश का दुर्भाग्य तो तब है जब यह विशाल देश, देश का प्रधानमंत्री नहीं, रिमोट कण्ट्रोल से चलने वाला एक गुड्डा चलता है ! देश के निर्णय वह व्यक्ति नहीं लेता जो देश और विदेश में विश्व के सब से बड़े लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व करता है बल्कि वो करता है जो खानदानी राजनितिक विरासत के बल पर प्रधानमंत्री तक के निर्णयों को पलट कर रख देता है! देश का दुर्भाग्य तो तब है सरदारजी जब एक आर्थिक नीतियों का जानकर व्यक्ति इस देश को आर्थिक शक्ति बनाने में नाकाम रहता है और देश को नित नए घोटालों की सौगात देता है! आखिर ऐसी क्या मज़बूरी है कि प्रधानमंत्री को पद पर रहते हुए ‘फेयरवेल’ की स्पीच देनी पड़ती है??

देश के वर्त्तमान को छोड़ आखिर एक पदासीन व्यक्ति क्यों इतिहास की बातें करने लगता है ? देश का दुर्भाग्य तो देश के सत्ता के दो केंद्र है मनमोहन जी ! आखिर क्यों आपके राजनितिक खेल का खामियाजा देश की भोली भाली जनता को चुकाना पड़े? क्या यह देश के लिए घातक नहीं है? देश के लिए यह घातक है कि कारगिल कि विधवाओं के लिए आंबटित फ्लैटों को हथियाने के षड़यंत्र में देश के नामी गिरामी नेता, अफसर, रसूक वाले लोग शामिल हो और जाँच पर जाँच बिठा कर मामले को रफा दफा किया जाय ?? देश के लिए यह घातक है कि देश का कर्णधार किसी व्यक्ति विशेष के सामने अपना स्वाभिमान, अपनी पगड़ी गिरवी रख दे!

कोर्ट के फैसले के बावजूद नरसंहार के नाम पर सिर्फ गुजरात को याद करे! एक सिख होने के बावजूद सिखों के कत्ले आम को भूल जाये, गोधरा, मुजफ्फरनगर को भूल जाये! सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक को मजबूत करने के लिए देश के गरिमामय पद से किसी व्यक्तिविशेष को घातक बताये! मोदी देश का दुर्भाग्य या सौभाग्य? यह तो आनेवाला कल बतायेगा लेकिन कहीं ऐसा न हो कि देश के इतिहासकार आपके कार्यकाल को देश के लिए सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और आपको देश के लिए सबसे घातक घोषित करे !

जरा अपने गिरेबान में झांक कर देखिये प्रधानमंत्री जी !

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